शाहजहांपुर/दिल्ली।व्यवसायी सचिन ग्रोवर के परिवार की आत्महत्या ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। 14 पन्नों में फैला सुसाइड नोट जहां कर्जखोरी की निर्दयी तस्वीर पेश करता है, वहीं परिवार की लाचारी, बेबसी और रिश्तों की दरकती दीवारों का दर्द भी बयान करता है।
सचिन ग्रोवर ने साफ-साफ लिखा कि सैकी आनंद 30% ब्याज पर रकम वसूलता था, और अगर सचिन किसी और से कम ब्याज पर कर्ज लेने की कोशिश करता, तो आनंद उसे रोक देता। दूसरी ओर, बग्गा से लिए गए पैसों को शराब बेचकर लौटाने का दबाव उस पर बनाया गया। लेकिन बग्गा ने दोबारा पूरी रकम की मांग कर दी। सचिन ने अपनी मां के नाम यह तक लिखा कि देवांग खन्ना के पास गाड़ी गिरवी है, उसे छुड़ाकर बेच देना और कर्ज उतार देना।
यह नोट केवल सचिन की लाचारी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहाँ कर्जदार की साँस तक गिरवी रखी जाती है।
👉शिवांगी की अंतिम चिट्ठी—“बुरी याद समझकर भूल जाना मम्मी”
सुसाइड नोट के पन्नों पर सचिन की पत्नी शिवांगी की लिखावट और भी दर्दनाक है।
उसने अपनी मां से कहा—
“सारी मम्मी… मैंने जो कुछ भी किया, उसकी कोई माफी नहीं है। मेरी कार मेरे मरने के बाद लोन फ्री हो जाएगी। उसे छुड़ाकर बेच लेना और अपना गोल्ड निकलवा लेना। किसी से डरना मत, सब बेचकर अपना जीवन जी लेना। हम नहीं चाहते कि तुम हमें नफरत से याद करो… बस बुरी याद समझकर भूल जाना।”
आखिर में उसने लिखा—
“आई लव यू… आई एम सॉरी यार… मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा था… डोंट हेट मी, प्लीज।”
👉कर्ज वसूली की दरिंदगी और परिवार की लाचारी
सचिन के नोट में जहां ब्याजखोरी का खूनी सच दर्ज है, वहीं शिवांगी के शब्द बताते हैं कि यह मौत केवल कर्ज का नतीजा नहीं, बल्कि टूटते हौसलों और रिश्तों की दरकन का भी अंत है। उसने सचिन के परिवार पर साथ न देने का भी कटाक्ष किया।
यह केवल एक परिवार की मौत नहीं, बल्कि समाज के लिए सवाल है—
क्या कर्ज चुकाने के लिए जिंदगी की कीमत ही चुकानी पड़ेगी?
क्या सूदखोरों का यह दबाव हमें इस हद तक धकेलता रहेगा कि पूरा परिवार मौत को गले लगा ले?
👉 यह सुसाइड नोट सिर्फ कागज़ के पन्ने नहीं, बल्कि हर लफ्ज़ खून से लिखा बयान है। इसमें झलकता है—
👉सूदखोरी का बेरहम चेहरा
👉रिश्तों में दरार की कसक
👉और एक बेटी, पत्नी, बेटे और पति की आखिरी चीख—
“भूल जाना हमें, नफरत से मत याद करना।”



